जिला कलेक्टर के द्वारा जारी किया गया आदेश जिसके अनुसार नशीली दवाइयां की खुली बिक्री पर रोक लगाई : जिला कलेक्टर कानाराम के द्वारा नशीली दवाइयां की बिक्री के लिए एक आदेश जारी किया गया है |
जिला कलेक्टर के द्वारा नशीली दवाइयां की खुली बिक्री पर रोक लगाई गई है | नशीली दवाइयां की बिक्री निर्धारित मात्रा में ही की जानी चाहिए यदि निर्धारित मात्रा से ज्यादा नशीली दवाइयां का क्रय विक्रय किया जाता है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी |
जिला कलेक्टर के द्वारा लगाई गई नशीली दवाइयां की खुली बिक्री पर रोक
हनुमानगढ़ जिले में नशीली दवाइयां का प्रयोग बढ़ने लगा है जिसके कारण जिला कलेक्टर के द्वारा नशीली दवाइयां की खुली बिक्री और निर्धारित मात्रा से ज्यादा नशीली दवाइयां की बिक्री पर रोक लगाई गई है |
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यह नशीली दवाइयां में कौन-कौन सी दवाई आती है ?
इन नशीली दवाइयां में प्रीगाबालीन , टपेंटाडोल , जोपिक्लोन साल्ट से आधारित दवाइयांआती है | इन सभी दवाइयां को लोगों के द्वारा टैबलेट या इंजेक्शंस के माध्यम से नशे के रूप में लिया जाता है जिसके कारण लोगों को इन दवाइयां की आदत पड़ जाती है |
यह उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी होती है इसलिए जिला कलेक्टर के द्वारा नशीले साल्ट वाली दवाइयां की खुली बिक्री पर रोक लगाई गई है |

स्थानीय भाषा में इन दवाइयो को किस नाम से जाना जाता है ?
स्थानीय भाषा में इन दवाइयो को सिग्नेचर, जोडियर, हरा तोता,संतरी , हरे कैप्सूल और नीला फोर्ड आदि के नाम से जाना जाता है | यह लोगों के लिए बहुत हानिकारक होती है |
जिला कलेक्टर ने नकली दवाइयां पर रोक क्यों लगाई है ?
लोगों के हित के लिए और युवा पीढ़ी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जिला कलेक्टर के द्वारा यह आदेश जारी किया गया है क्योंकि आज की युवा पीढ़ी नशे के जाल में फंसती जा रही है और नशीली दवाइयो की गुलाम बनती जा रही है |
इसलिए जिला कलेक्टर के द्वारा दवाइयां की खुली बिक्री और अनियंत्रित बिक्री पर रोक लगाई गई है | आज की युवा पीढ़ी नशे के चक्कर में नहीं पड़े और वह अपना भविष्य नशा मुक्ति बनाए और अपने जीवन को स्वस्थ तरीके से जिए |
इस आदेश के अनुसार लोग कितनी दवाई खरीद सकते हैं ?
इस कानून के लागू होने के बाद नशीली दवाइयां के थोक विक्रेता प्रेगाबलीन की 75 ग्राम से अधिक मात्रा को खरीद और बेच नहीं पाएंगे | दुकानदार प्रीगाबालीन , टपेंटाडोल , जोपिक्लोन साल्ट वाली दवाइयां की खरीद व बेच बिल के बिना नहीं कर सकेंगे |
यदि मेडिकल वाले दवाइयां का क्रय विक्रय करते हैं तो उन्हें दवाइयां की सारी डिटेल रजिस्टर में लिखना पड़ेगा ताकि यह अंदाजा लगाया जा सके की उनके द्वारा कितनी दवाइयां दवाइयां की बिक्री की गई है | इन दवाइयां की खरीद तभी की जा सकती है जब डॉक्टर के द्वारा प्रशिक्षण पर्ची पर इन दवाइयां को मेंशन किया जाएगा और पर्ची पर अस्पताल की मोहर लगेगी |
जिला कलेक्टर कानाराम के द्वारा यह निर्देश भी जारी किया गया है कि सहायक नियंत्रक टीम के द्वारा यह आदेश दिया गया है हर महीने खुदरे मूल्य पर बेचने वाले दवाइयां की दुकान की जांच की जाएगी ,
इसके लिए सहायक समिति के द्वारा एक टीम गठित की गई है जो हर महीने मेडिकल स्टोर पर अचानक से मेडिकल निरीक्षण के लिए जाएंगे कि किसी ने निश्चित मात्रा से अधिक दवाइयां नहीं बेची गई है | अगर किसी भी प्रकार से नियमों का उल्लंघन किया गया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी |
यह नियम 2 महीने की अवधि तक प्रभावी रहेगा
जिला कलेक्टर के द्वारा इस नियम को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है जो भी इस आदेश का उल्लंघन करेगा , पुलिस प्रशासन में उपकरण अधिकारी द्वारा भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी | यह आदेश अगले 2 महीने की अवधि तक प्रभावी रहेगा |
