PMAY का कड़वा सच: रावतसर में गरीबों के हक पर भ्रष्टाचार की मार
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का उद्देश्य हर गरीब को सिर पर पक्की छत देना है, लेकिन राजस्थान के रावतसर (वार्ड नंबर 2) से एक ऐसा मामला सामने आया है जो इस योजना की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करता है। “सच बेखौफ” की इस रिपोर्ट में एक गरीब परिवार ने नगर पालिका से जुड़े लोगों पर धांधली और रिश्वतखोरी के बड़े आरोप लगाए हैं।
रिश्वत का खेल: “30,000 रुपये दो, तभी आएगी किस्त”
वीडियो में अमरजीत नाथ नामक व्यक्ति ने खुलासा किया कि उन्हें अपने मकान के लिए मिलने वाली सरकारी सहायता में से 30,000 रुपये की रिश्वत देनी पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि “कमलेश” नाम के एक व्यक्ति ने उनसे कहा कि यदि वे 30,000 रुपये नकद देंगे, तभी उनके खाते में अगली किस्त जारी की जाएगी। यह पैसा ऑनलाइन के बजाय नकद (Cash) लिया गया ताकि कोई सबूत न रहे।
नियमों की अनदेखी: RCC की जगह ‘डाट’ की छत
PMAY के तहत मकान की छत आरसीसी (RCC) की होनी अनिवार्य है, लेकिन यहाँ भ्रष्टाचार के कारण नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं:
गलत पासिंग: अमरजीत के अनुसार, उनसे कहा गया कि चाहे आरसीसी लगाओ या ‘डाट’ (ईंटों की पारंपरिक छत), काम चल जाएगा।
दस्तावेजों में हेराफेरी:
आरोप है कि फील्ड वेरिफिकेशन के दौरान अधिकारियों ने ईंटों वाली ‘डाट’ की छत को ही कागजों में पास कर दिया, जो बिना मिलीभगत के मुमकिन नहीं है।
मजदूर परिवार पर दोहरी मार
अमरजीत खुद एक फेरीवाले हैं और मेहनत-मजदूरी कर अपना गुजारा करते हैं। उन्होंने बताया कि मकान बनाने में उनका 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक खर्च हो चुका है। एक तरफ सरकारी मदद में से मोटी रकम रिश्वत में चली गई, और दूसरी तरफ उन्हें डर है कि नियम पूरे न होने पर भविष्य में उन्हें परेशानी न हो।
प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
रावतसर नगर पालिका के भीतर चल रही यह धांधली दर्शाती है कि कैसे बिचौलिए और कर्मचारी मिलकर प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना को पलीता लगा रहे हैं। गरीब परिवार डरा हुआ है और उन्होंने अब तक उच्च अधिकारियों से इसकी लिखित शिकायत भी नहीं की है।
निष्कर्ष: यह रिपोर्ट शासन और प्रशासन के लिए एक आईना है। क्या इन भ्रष्ट कर्मियों पर कार्रवाई होगी या गरीब अपनी मेहनत की कमाई यूँ ही लुटाता रहेगा?